Saturday, April 4, 2015

Bhog Vandana - आओ भोग लगाओ मेरे मोहन

आओ भोग लगाओ मेरे मोहन।
आओ भोग लगाओ मेरे मोहन।।

(०)
ऐसा भोग लगाओ मेरे मोहन,
सब अमृत हो जाये मेरे मोहन।
आओ भोग लगाओ मेरे मोहन।।
(१)
दुर्योधन की मेवा त्यागी,
साग विदुर घर पाओ मेरे मोहन।
आओ भोग लगाओ मेरे मोहन।।
(२)
सबरी के बेर सुदामा के तन्दुल,
रूचि रूचि भोग लगाओ मेरे मोहन।
आओ भोग लगाओ मेरे मोहन।।
(३)
राधा और मीरा भी बोले,
मन मंदिर में आओ मेरे मोहन।
आओ भोग लगाओ मेरे मोहन।।
(४)

हम भक्तो की यही है अरजी,
आकर दरश दिखाओ मेरे मोहन।
आओ भोग लगाओ मेरे मोहन।।


आओ भोग लगाओ मेरे मोहन।।
आओ भोग लगाओ मेरे मोहन।।

Seeta Ram Seeta Ram Kahiye - सीताराम सीताराम, सीताराम कहिये

सीताराम सीताराम, सीताराम कहिये।
सीताराम सीताराम, सीताराम कहिये। 
जाहि विधि राखे राम, ताहि विधि रहिये ।।

(१)
मुख में हो राम नाम, राम सेवा हाथ में ।
तू अकेला नाहि प्यारे, राम तेरे साथ में ।।

विधि का विधान जान, हानि लाभ सहिये।
जाहि विधि राखे राम, ताहि विधि रहिये ।।
सीताराम सीताराम, सीताराम कहिये।

(२)
किया अभिमान तो फिर, मान नहीं पायेगा।
होगा प्यारे वही, जो राम जी को भायेगा ।।
फल, आशा, त्याग, शुभ काम करते रहिये। 
जाहि विधि राखे राम, ताहि विधि रहिये ।।
सीताराम सीताराम, सीताराम कहिये।

(३)
जिन्दगी की डोर सौंप , हाथ दीनानाथ के ।। 
महलों में राखे चाहे, झौपड़ी में वास दे।।
धन्यवाद निविवाद , राम-राम कहिये।
जाहि विधि राखे राम, ताहि विधि रहिये ।।
सीताराम सीताराम, सीताराम कहिये।

(४)
आशा एक राम जी से, दूजी आशा छोङ दे।
नाता एक रामजी से, दूजा नाता तोङ दे ।।
साधु संग, राम रंग, अंग अंग रंगिये।
काम-रस त्याग प्यारे, राम-रस पगिये।।
सीताराम सीताराम, सीताराम कहिये।
जाहि विधि राखे राम, ताहि विधि रहिये ।।
सीताराम सीताराम, सीताराम कहिये।

सीताराम सीताराम, सीताराम कहिये। 
जाहि विधि राखे राम, ताहि विधि रहिये ।।

JAI GANESH JAI MAHADEVA - जय गणेश जय महादेवा

जीने का सबक सीखा, साईं के फकीरों से।
तकदीर झलकती है, हाथो की लकीरों से।

(०)
जय गणेश जय महादेवा-2
दुखियन पे कृपा करो-2
करें तेरी सेवा..
जय गणेश
ॐ नमो नमो नमो नमो नमः-4

(१)
माता जाकी पार्वती-2
जो पार करे नएया, ओ पार्वती मैया-2
जो भाग्य बनाता है, महादेव कहलाता है-2
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा. ..
जय गणेश .....
ॐ नमो नमो.........

(२)
जिनको गुरुर है अपनी दोलत पे,
साँसे खरीद ले उसकी मोहलत पे-2

कोई लाया फूल यहाँ-2
कोई  लाया फूल की माला
में क्या लाऊ तेरे नाम का खाऊ
कोई लाया फूल यहाँ
कोई लाया मेवा
जय गणेश जय महादेवा-2
ॐ नमो नमो.........

Monday, February 16, 2015

Barse Bundiyan Savan ki - बरसे बुंदियाँ सावन की

बरसै बुंदियाँ सावन की,
सावन की मनभावन की।
(१)
सावन में उमग्यो मेरो मन,
भनक सुनी हरि आवन की।
उमड़ घुमड़ चहुं दिसि से आयो,
दामनि दमके झर लावन की।
बरसै बुंदियाँ सावन की,
सावन की मनभावन की।
(२)
आ~~~~
नन्हीं नन्हीं बूंदन मेहा बरसै,
सीतल उपवन सोहावन की।
मीराके प्रभु गिरधर नागर,
आनंद मंगल गावन की।
बरसै बुंदियाँ सावन की
सावन की मनभावन की।।

-मीराबाई

Thursday, January 22, 2015

Maine bandh liya prem vala - मैंने बाँध लिया, प्रेम वाला कँगना

मैंने बाँध लिया, हो मैंने बाँध लिया,
मैंने बाँध लिया, प्रेम वाला कँगना,
आओ आओ हरि आओ मोरे अँगना।

(१)
मेरा मन पापी, पाप करना हि छोड़ दे।
दुनिया से नाता तोड़, तेरे संग जोड़ दे।
यही मांग मेरी, यही मांग मेरी
यही मांग मेरी, और कोई मँगना।
आओ आओ हरि आओ मोरे अँगना।।

मैंने बाँध लिया, प्रेम वाला कँगना,
आओ आओ हरि आओ मोरे अँगना।

(२)
मेरा मन प्रभु ये, पावन तू कर दे।
मेरा तेरा नाता जुड़े,  ऐसा मुझे वर दे।
तेरे रंग ऊपर, हो तेरे रंग ऊपर।
तेरे रंग ऊपर, तेरे रंग ऊपर,
तेरे रंग ऊपर, चढ़े कोई रंग ना।
आओ आओ हरि आओ मोरे अँगना।।

मैंने बाँध लिया, प्रेम वाला कँगना,
आओ आओ हरि आओ मोरे अँगना।

(३)
ये मेरे श्याम प्रभु, तेरा गुण गाउँ।
तेरा गुण गाँउ मै तो तुझको रिझाऊँ
तेरे शिवा,  तेरे शिवा,
तेरे शिवा, मेरे और कोई सँगना।
आओ आओ हरि आओ मोरे अँगना।।

मैंने बाँध लिया, प्रेम वाला कँगना,
आओ आओ हरि आओ मोरे अँगना।

Monday, January 19, 2015

Daras Bin Dukhan Lage Nain - दरस बिन दूखण लागे नैन

दरस बिन दूखण लागे नैन।
जबसे तुम बिछुड़े प्रभु मोरे, कबहुं न पायो चैन।
सबद सुणत मेरी छतियां, कांपै मीठे लागै बैन।
बिरह व्यथा कांसू कहूं सजनी, बह गई करवत ऐन।
कल न परत पल हरि मग जोवत, भई छमासी रैन।
मीरा के प्रभु कब रे मिलोगे, दुख मेटण सुख देन।

-मीराबाई 

Mero To Girdhar Gopal - मेरे तो गिरधर गोपाल (मीराबाई)

मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई॥
जाके सिर है मोरपखा मेरो पति सोई।
तात मात भ्रात बंधु आपनो न कोई॥
छांड़ि दई कुलकी कानि कहा करिहै कोई॥
संतन ढिग बैठि बैठि लोकलाज खोई॥
चुनरीके किये टूक ओढ़ लीन्हीं लोई।
मोती मूंगे उतार बनमाला पोई॥
अंसुवन जल सींचि-सींचि प्रेम-बेलि बोई।
अब तो बेल फैल गई आणंद फल होई॥
दूध की मथनियां बड़े प्रेम से बिलोई।
माखन जब काढ़ि लियो छाछ पिये कोई॥
भगति देखि राजी हुई जगत देखि रोई।
दासी मीरा लाल गिरधर तारो अब मोही॥

- मीराबाई