ये मानुस का अनमोल, जनम हर बार नही मिलता-3
है इसका बहुत कुछ मोल,
है इसका बहुत कुछ मोल, यू ही सरकार नही मिलता।
ये मानुस का अनमोल, जनम हर बार नही मिलता-2
१)
पूरे चौरासी, लाख जनम के, बाद है बारी आती-2
ओ भी तभी जब, तन मन धन से, सतकरनी की जाती,
वरना इस चोले का,
वरना इस चोले का युहीं अधिकार नही मिलता।
२)
बहुत दान...बहुत दान.. बहुत दान......
बहुत दान बहु पुन्य तप किये, की है बहुत कुर्बानी-2
तब पाया है, सुन्दर जीवन, मूरख कदर ना जानी,
आ~
जीती बाजी जाये हार,
जीती बाजी जाये हार, उसे सत्कार नही मिलता-2
है इसका बहुत कुछ मोल
है इसका बहुत कुछ मोल, यू ही सरकार नही मिलता
ये मानुस का अनमोल, जनम हर बार नही मिलता-2
3)
पाना है... पाना है... पाना है....
पाना है उस परमेश्वर को तो इसी जनम में पाओ,
यही है मौका "श्रीधर" इसको भूल के ना बिसराओ,
आ~
डाली से बिछड़े फूल,
डाली से बिछड़े फूल को फिर आधार नही मिलता,
है इसका बहुत कुछ मोल, यू ही सरकार नही मिलता।
है इसका बहुत कुछ मोल,
है इसका बहुत कुछ मोल, यू ही सरकार नही मिलता।
ये मानुस का अनमोल, जनम हर बार नही मिलता-2
१)
पूरे चौरासी, लाख जनम के, बाद है बारी आती-2
ओ भी तभी जब, तन मन धन से, सतकरनी की जाती,
वरना इस चोले का,
वरना इस चोले का युहीं अधिकार नही मिलता।
२)
बहुत दान...बहुत दान.. बहुत दान......
बहुत दान बहु पुन्य तप किये, की है बहुत कुर्बानी-2
तब पाया है, सुन्दर जीवन, मूरख कदर ना जानी,
आ~
जीती बाजी जाये हार,
जीती बाजी जाये हार, उसे सत्कार नही मिलता-2
है इसका बहुत कुछ मोल
है इसका बहुत कुछ मोल, यू ही सरकार नही मिलता
ये मानुस का अनमोल, जनम हर बार नही मिलता-2
3)
पाना है... पाना है... पाना है....
पाना है उस परमेश्वर को तो इसी जनम में पाओ,
यही है मौका "श्रीधर" इसको भूल के ना बिसराओ,
आ~
डाली से बिछड़े फूल,
डाली से बिछड़े फूल को फिर आधार नही मिलता,
है इसका बहुत कुछ मोल, यू ही सरकार नही मिलता।
- श्री सामंत जी "श्रीधर"
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