गाइये गणपति जगवंदन,
शंकर सुअन नन्दन ।
शंकर सुअन नन्दन ।
सिद्धि सदन गजवदन विनायक,
कृपासिंधु सुन्दर सबलायक ॥
कृपासिंधु सुन्दर सबलायक ॥
मोदक प्रिय मुदमंगल दाता,
विद्द्यावारिधी बुद्धि विधाता ।
विद्द्यावारिधी बुद्धि विधाता ।
मागत तुलसिदास कर जोरे,
बसहि रामसिय मानस मोरे ॥ १॥
बसहि रामसिय मानस मोरे ॥ १॥
विनय पत्रिका (प्रथम पद)
(गोस्वामी तुलसीदास रचित )
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