Friday, May 2, 2014

Apni dhun main rahata huin - अपनी धुन में रहता हूँ, राधे राधे कहता हूँ।

 अपनी धुन में रहता हूँ, राधे राधे कहता हूँ-2
राधे राधे, राधे राधे,राधे राधे राधे श्री राधे-4
(1)
जब से तेरा नाम लिया मेरा, जीवन जैसे बदल गया-2
मारा मारा फिरता था मुझे, एक ठिकाना मिल गया-2
मस्ती में अब रहता हूँ, राधे राधे कहता हूँ-2
अपनी धुन में रहता हूँ, राधे राधे कहता हूँ-2
राधे राधे, राधे राधे,राधे राधे राधे श्री राधे-4

(2)
तेरी किरपा से श्री राधे, सन्तन का मुझे संग मिला
ठोकर खाने वाला था गुरु, तूने आ के थाम लिया
संत शरण में रहता हूँ, राधे राधे कहता हूँ
अपनी धुन में रहता हूँ, राधे राधे कहता हूँ-2
राधे राधे, राधे राधे,राधे राधे राधे श्री राधे-4

(3)
ना जाने दुनिया भर के सब, कारज कैसे होते है
जो नहि लेते नाम तेरा वो, जाने कैसे जीते है
प्रिया शरण में रहता हूँ, राधे राधे कहता हूँ।
अपनी धुन में रहता हूँ, राधे राधे कहता हूँ-2
राधे राधे, राधे राधे,राधे राधे राधे श्री राधे-4

(4)
कहे गोविन्द दास मै तेरी, आस लगाये बैठा हूँ-2
ना जाने अब कौन गली में, एक झलक मोहे मिल जाये
बस्ती बस्ती फिरता हूँ, राधे राधे कहता हूँ
अपनी धुन में रहता हूँ, राधे राधे कहता हूँ-2
राधे राधे, राधे राधे,राधे राधे राधे श्री राधे-4

-श्री गोविन्द भार्गव जी

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